
आज के दौर में जहाँ प्यार का भविष्य Last Seen और Block List तय करती है, वहीं Aashiqui (1990) हमें उस ज़माने में ले जाती है जब मोहब्बत दिल से निकलकर सीधे कैसेट में रिकॉर्ड होती थी। महेश भट्ट की यह फिल्म सिर्फ़ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि 90s की Emotional Economy का सबसे बड़ा प्रोडक्ट थी।
यह वही दौर था जब लोग प्यार में पड़ने से पहले नहीं, प्यार में पड़ने के बाद सोचते थे।
Storytelling: Romance With Rebellion
फिल्म का नायक राहुल (Rahul Roy) एक ऐसा नौजवान है जो अपने पिता की दूसरी शादी से नाराज़ है। नाराज़गी इतनी कि वह शादी में जाकर emotional vandalism कर देता है — गाड़ियाँ तोड़ता है, रिश्ते तोड़ता है और अंत में पुलिस स्टेशन पहुँच जाता है।
यानी साफ है: 90s का हीरो भी सिस्टम से भिड़ता था, बस ट्विटर पर नहीं।
वहीं अनु (Anu Aggarwal) एक अनाथ लड़की है, जो दमनकारी गर्ल्स हॉस्टल और समाज की “मर्यादा” में कैद है। दोनों की मुलाक़ात पुलिस स्टेशन में होती है — जो यह बताने के लिए काफी है कि सच्चा प्यार हमेशा नियमों के खिलाफ़ पैदा होता है।
आज अगर राहुल होता, तो उसे पहले Counseling, फिर FIR और फिर Social Media Trial झेलना पड़ता।
Music: असली हीरो, असली स्टार
अगर Aashiqui की आत्मा किसी में बसती है, तो वह है इसका संगीत। Nadeem-Shravan ने ऐसा म्यूज़िक दिया, जिसने न सिर्फ़ फ़िल्म को सुपरहिट बनाया, बल्कि Bollywood Playback Industry को री-डिज़ाइन कर दिया।
“अब तेरे बिन”, “धीरे धीरे से”, “तू मेरी ज़िंदगी है” — ये गाने नहीं थे, ये 90s के heartbreak manuals थे। Kumar Sanu की आवाज़ उस दौर में हर दिल की Default Ringtone बन गई थी।
आज के कई सिंगर्स Famous हैं, लेकिन 30 साल बाद सुने जाएंगे या नहीं — ये सवाल Aashiqui आज भी उनसे पूछती है।
Acting: सीमित एक्सप्रेशन, अनलिमिटेड फील
Rahul Roy की एक्टिंग technically flawless नहीं थी, लेकिन emotional honesty से भरी हुई थी। Anu Aggarwal की मासूमियत कैमरे के सामने अभिनय नहीं लगती, बल्कि जी हुई लगती है। Deepak Tijori दोस्त के रोल में वही करता है जो हर 90s दोस्त करता था — सपोर्ट सिस्टम बनना, सलाह देना और चुपचाप साथ खड़ा रहना।
यह फ़िल्म performance-driven नहीं थी, यह feeling-driven थी — और यही इसकी ताकत बनी।

Career vs Love: समय से आगे की सोच
फिल्म का दूसरा हिस्सा आज भी surprisingly relevant है। अनु का मॉडलिंग करियर, कॉन्ट्रैक्ट में शादी पर रोक, और राहुल का ego clash — यह सब बताता है कि Aashiqui सिर्फ़ प्रेम कहानी नहीं, बल्कि relationship और ambition के टकराव की कहानी भी थी।
1990 में ही फिल्म बता गई थी कि Career और Love का Balance आसान नहीं होता — हमने 2025 में आकर ये सीखा।
Awards, Records और Legacy
Aashiqui का म्यूज़िक आज भी Hindi Cinema का सबसे ज़्यादा बिकने वाला एल्बम है। Filmfare Awards से लेकर Critics तक — सबने माना कि यह फ़िल्म नहीं, एक Cultural Moment थी।
यही वजह है कि 2013 में बनी Aashiqui 2 भी उसी नाम से आई — क्योंकि Industry जानती थी, Brand आज भी ज़िंदा है।
जहाँ आज की Love Stories Dark, Toxic और Broken हैं, वहीं Aashiqui की मोहब्बत मासूम थी लेकिन दिल से सच्ची थी। आज के सिनेमा में Love एक Phase है, Aashiqui में Love एक Identity था।
Aashiqui (1990) आज भी इसलिए relevant है क्योंकि इसने साबित किया कि जब कहानी simple हो संगीत दिल से निकले और भावना बनावटी न हो तो सिनेमा समय को मात दे देता है।
कुछ फिल्में देखी जाती हैं, और कुछ — जैसे Aashiqui — सुनी, महसूस की और याद रखी जाती हैं।
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